रफी साहब की आवाज में वो कशिश थी जो रूह को छू लेती थी। उनके उदास गानें सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक अहसास हैं।
90 के दशक का संगीत अपनी सादगी और बेहतरीन शायरी (Lyrics) के लिए जाना जाता है। उस समय के गाने सिर्फ सुने नहीं, बल्कि महसूस किए जाते थे। 'सदाबहार' शब्द इन गानों पर बिल्कुल सटीक बैठता है क्योंकि ये समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। 'मेरे नैना सावन भादो'
यह पोस्ट 90 के दशक और उससे पहले के उन सदाबहार गानों का एक खूबसूरत संग्रह है, जो आज भी हमारे दिल के सबसे करीब हैं। जब बात दर्द भरे या 'Sad Songs' की आती है, तो इन तीन दिग्गजों की आवाज़ का कोई मुकाबला नहीं: 'मेरे नैना सावन भादो'
दीदी की आवाज में वो ठहराव और दर्द था जो आँखों में आँसू ला देता था। 90 के दशक में भी उन्होंने कई यादगार गमगीन गाने दिए। 'मेरे नैना सावन भादो'
'chingari koi bhadke', 'मेरे नैना सावन भादो', और 'घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूँ'।